Capital Gearing Ratio क्या हैं | Capital Gearing Ratio in Hindi

Leverage एक दोधारी तलवार की तरह हैं , अगर किसी कंपनी द्वारा इसका उपयोग सही तरीके से किया जाए , तो यह कंपनी की sales को बढ़ाने के साथ-साथ उसके मुनाफे को बढ़ाने में मदद करता हैं |

बजाय इसके , अगर इसका गलत तरीके से उपयोग किया जाए , यानि इसे balance न रखा जाए , तो यह आगे जाकर कई समस्यां खड़ी कर सकता हैं |

आज के इस article में हम Capital  Gearing Ratio के बारें में जानेंगे , जो कंपनी के Financial leverage के बारें में मह्त्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता हैं , जैसे Capital  Gearing Ratio क्या हैं , Capital  Gearing Ratio Formula , Capital  Gearing Ratio क्यों मह्त्वपूर्ण हैं तथा Capital  Gearing Ratio का उपयोग कैसे करें इत्यादि , तो चलिए शुरू करतें हैं –

 

Capital Gearing Ratio क्या हैं

Capital  Gearing Ratio को Financial leverage या Capital Structure Ratio भी कहा जाता हैं , क्योंकि Capital  Gearing Ratio से हमे पता चलता हैं , की कोई कंपनी अपनी Common Equity की तुलना में कितने Fixed Interest Bearing Capital का उपयोग कर रही हैं , इसे short में CGR भी कहा जाता हैं |

यहाँ पर Fixed Interest Bearing Capital से मतलब हैं , वो capital जिस पर कंपनी को एक Fixed Rate of Interest या Dividend के साथ payment करनी हैं |

अगर fixed interest bearing capital “Common Equity” की तुलना में ज्यादा हैं , तो इसका मतलब हैं , कंपनी के पास वो capital ज्यादा हैं , जिस पर कंपनी को एक तय rate के साथ Interest या Dividend देना हैं , तो यह High Risk की और इशारा करता हैं |

वहीँ , अगर fixed interest bearing capital “Common Equity” की तुलना में कम हैं या balance में हैं , तो यह Optimal Risk या Low Risk के जैसा हैं |

 

Capital Gearing Ratio

 

तो Capital Gearing Ratio हमे किसी कंपनी के Capital Structure के बारें में बताता हैं , अगर यह ratio 1 से ज्यादा है , तो कंपनी Highly Geared यानि High Risk मानी जाती हैं|

वहीँ , अगर यह ratio 1 से कम हैं , तो यह Low Geared यानि Low risk मानी जाती हैं |

Capital  Gearing Ratio को calculate करने के लिए Fixed Interest Bearing Capital को Common Equity से भाग दिया जाता हैं , चलिए इसे फॉर्मूले की साहयता से समझतें हैं –

 

Capital  Gearing Ratio Formula

 

Capital Gearing Ratio Formula

 

यहाँ पर Numerator में दिए गएँ fixed interest bearing capital से अर्थ हैं , वो Capital जिस पर कंपनी को एक ( fixed rate of interest या dividend ) देना हैं , उदहारण के तौर पर Long-term loan , Short-term loan , Bonds , Debentures और Preference share capital

Preference share capital को Fixed Interest bearing capital में इसलिए शामिल किया जाता हैं , क्योंकि कंपनी को preference shareholders को एक fixed rate के साथ dividend देना होता हैं |

Preference share “common equity shares” से अलग होतें हैं , जिस वजह से इन्हे अलग से कुछ preferences दी जाती हैं | अगर आप preference shares के बारें में और ज्यादा जानना चाहतें हैं , तो हमारी पोस्ट शेयर क्या हैं ? इसे पढ़ सकतें हैं |

किसी कंपनी का Capital  Gearing Ratio आप कैसे पता कर सकतें हैं , चलिए इसे एक उदहारण की साहयता से समझतें हैं –

 

Capital  Gearing Ratio Example

मान लीजिये कोई XYZ कंपनी हैं , जिसका capital structure कुछ इस तरह हैं :-

 

Capitalvalue in lakh
Common Equity10
Reserve & Surplus50
Total Common Equity60
Short-term loan @ 8 %15
Long-term loan @ 12 %25
Debentures @ 9 %10
Bonds @ 7 %8
Preference share capital @ 9 %12
Total Fixed Interest Bearing Capital 70

 

इस प्रकार कंपनी XYZ के लिए Capital Gearing Ratio हुआ , 

=  70 / 60 

1.16 or 7 / 6   ( Highly Geared )

 

आप देख सकतें हैं , कंपनी XYZ का CGR 7/6 हैं , जिसका मतलब हैं , कंपनी हर रु 6 की Common equity पर रु 7 का Fixed interest bearing capital का उपयोग कर रही हैं , जो की highly geared हैं | 

इस तरह आप किसी भी कंपनी के लिए Capital Gearing Ratio पता कर सकतें हैं | 

 

Capital Gearing Ratio क्यों मह्त्वपूर्ण हैं ?

Capital Gearing Ratio एक बेहद मह्त्वपूर्ण Financial metric हैं , जो की किसी कंपनी के Financial Structure के बारें में बताता हैं , यानि की कोई कंपनी अपनी Common Equity की तुलना में कितने leverage का उपयोग कर रही |

जाहिर सी बात हैं , यह ratio जितना कम होगा , उतना अच्छा होगा , वहीँ अगर यह ratio ज्यादा होता है , तो कंपनियों के Revenue का एक बड़ा हिस्सा interest payment में जाता हैं | जो की कंपनी के मुनाफे पर असर डालता हैं | 

और किसी कारण आर्थिक मंदी की वजह से कंपनियों के revenue में गिरावट आती हैं , तो भी कंपनियों को Fixed Interest payment तो देनी ही होगी , इसलिए Highly Geared कंपनियों पर दिवालिया होने का खतरा अधिक बना रहता हैं | 

लेकिन ऐसा जरुरी नहीं है , की किसी कपनी का CGR अन्य किसी कंपनी की तुलना में ज्यादा हैं , तो वो कंपनी दिवालिया हो जायेगी | 

Generally , Utilities sector की कंपनियों में CGR अन्य sector की कंपनियों में की तुलना में ज्यादा देखने को मिलता हैं , ऐसा इसलिए क्योंकि इन्हे अपना बिज़नेस Run करने के लिए large amount में capital को invest करना पड़ता हैं | लेकिन इसी के साथ इनका cash flow भी काफी stable रहता हैं | 

इसलिए जब भी आप किसी कंपनी का CGR पता करें , तो उसे आप same sector की कपनियों के साथ जरूर compare कर लें | 

 

Capital Gearing Ratio कितना होना चाहिए ?

Generally , Capital Gearing Ratio का 1 से ज्यादा होना , highly geared माना जाता हैं , जो की दिवालिया होने का खतरा बना रहता हैं , वही अगर यह ratio 0.5 से 1 के बीच में हैं , तो भी यह काफी हद तक risky हैं | 

आमतौर पर 0.25 से 0.5 के बीच इस ratio का होना एक optimal risk माना जाता हैं , वहीँ अगर यह ratio 0.25 से भी कम हैं , तो यह एक low risk माना जाता हैं | 

 

Capital Gearing Ratio का उपयोग कैसे करें ?

Generally , Capital Gearing Ratio का उपयोग creditor , lenders यानि बैंकों द्वारा किया जाता हैं | इस ratio की साहयता से किसी कंपनी की creditworthiness का पता चलता हैं | अगर कोई कंपनी पहले से ही highly geared हैं , तो ऐसे में उस कंपनी को और ज्यादा leverage नहीं दिया जाता | वहीँ दूसरी और निवेशकों के लिए , किसी कंपनी का capital structure पता लगाने में यह ratio काफी मह्त्वपूर्ण साबित हो सकता हैं | 

Generally , कोई भी निवेशक , ऐसी कंपनी में निवेश करना नहीं चाहेगा , जो Highly geared हो , यानि जिसका capital structure संतुलन में न हो | 

जब भी आप किसी कंपनी का CGR पता करें , उसकी तुलना आप Industry benchmark और peer comparison से कर सकतें हैं , क्योंकि कोई भी single ratio अपने आप में ज्यादा कुछ नहीं बताता , जब तक उसकी तुलना , उसी sector में काम कर रही बाकी कंपनियों से न की जाएँ | 

ध्यान दें , किसी भो कंपनी में निवेश करतें समय , किसी एक single ratio पर निर्भर न रहें , बल्कि इसके लिए आप कंपनी को अलग-अलग Financial ratios के parameters पर उतर सकतें हैं | 

 

 

 

 

 

 

उम्मीद करतें हैं इस पोस्ट के माध्यम से दी गयी जानकारी जैसे ( Capital Gearing Ratio क्या हैं , Capital Gearing Ratio formula , Capital Gearing Ratio क्यों मह्त्वपूर्ण हैं तथा Capital Gearing Ratio का उपयोग कैसे करें इत्यादि ) ,  आपके लिए उपयोगी साबित होगी | 

अगर आपके पास इस पोस्ट से जुड़े अभी भी कोई सवाल हैं , तो उसे आप हमसे निचे दिए गएँ comment section में पूंछ सकतें हैं | 

 

 

 

 

 

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