Debt to Capital Ratio क्या हैं | Debt to Capital Ratio Meaning in Hindi

किसी कंपनी में निवेश करतें समय सबसे पहले क्या देखा जाना चाहिए ? जवाब हैं – कर्ज !

जाहिर सी बात है , किसी कंपनी जितना कम कर्ज होगा , वो उतने ही लम्बे समय तक survive कर पाएगी | Solvency Ratios की चर्चा करतें समय हमने Debt Ratios , Debt Service Coverage Ratio के बारें में विस्तार से जानकारी प्राप्त की थी | अगर आप इनके बारें में और ज्यादा जानना चाहतें हैं , तो आप  link पर click करके उस पोस्ट को पढ़ सकतें हैं |

आज के इस article में हम Debt to Capital Ratio के बारें में जानने वाले हैं , जैसे Debt to Capital Ratio क्या हैं , Debt to Capital Ratio Formula , Debt to Capital Ratio Example तथा Debt to Capital Ratio से हमे क्या पता चलता हैं इत्यादि | तो चलिए शुरू करतें हैं –

 

Debt to Capital Ratio क्या हैं

Debt to Capital Ratio एक मह्त्वपूर्ण Financial metric हैं , जो की किसी कंपनी के financial leverage के बारें में बताता हैं , जैसा की हम जानते हैं , जब कोई कंपनी अपना Business Grow करने के लिए fund जुटाती हैं , तो वो Debt तथा Equity के जरिये ही जुटाती हैं |

तो इस प्रकार Debt to Capital Ratio हमे यही बताता हैं , की कोई कंपनी अपने day to day operations run करने के लिए अपनी Total capital की तुलना में debt का कितना उपयोग कर रही हैं | इसे short में D/C Ratio भी कहा जाता हैं |

उदहारण के तौर पर , अगर किसी कंपनी का Debt to capital ratio 30 % हैं , तो इसका मतलब हैं , उस कंपनी के total debt की तुलना में उसका 30 % हिस्सा Debt Funding के जरिये जुटाया गया हैं |

यह Ratio जितना कम होता हैं , निवेशकों के लिए उतना ही अच्छा होता है , जबकि इस Ratio का ज्यादा होना , अक्सर जोखिम भरा माना जाता हैं | 

Debt to Capital Ratio निकालने के लिए Total debt को Total capital से विभाजित किया जाता हैं | यहाँ पर numerator में दिए गएँ total debt से अर्थ हैं , वो debt जिस पर कंपनी को interest का भुगतान करना हैं | चलिए इसे फॉर्मूले की साहयता से समझतें हैं –

 

Debt to Capital Ratio Formula

 

Debt to capital ratio formula

 

यहाँ पर numerator में दिए गए total debt से अर्थ है Long-term debt + Short-term debt

Long-term debt को Long-term borrowings तथा Short-term debt को Short-term borrowings भी कहा जाता हैं | इसे आप कंपनी की Balance sheet में Current liabilities तथा Non-current liabilities में आसानी से देख सकतें हैं |

जबकि denominator में दिए गएँ Total capital से अर्थ है , Total debt + Shareholders equity . Shareholders equity को Shareholders fund भी कहा जाता हैं | इस तरह debt to capital ratio निकालने के लिए सभी जरुरी चीजें आपको कंपनी की balance sheet में मिल जाती हैं |

किसी भी कंपनी का debt to capital ratio कैसे पता करें , चलिए इसे एक उदहारण की साहयता से समझतें हैं –

 

Debt to Capital Ratio Example

मान लीजिये कोई XYZ कंपनी हैं , जिसके पास short-term debt 3,00,000 और long-term debt 6,00,000 हैं , इसके अलावा कंपनी XYZ की Total shareholders equity 15,00,000 हैं , तो कंपनी XYZ का debt to capital ratio क्या होगा ?

Debt to capital ratio =  ( 3,00,000 + 6,00,000 ) / ( 3,00,000 + 6,00,000 ) + 15,00,000

37.5 %

आप देख सकतें हैं , कंपनी XYZ का Debt to capital ratio 37.5 % हैं , जिसका मतलब कंपनी XYZ अपने operations run करने के लिए , अपनी total capital का 37.5 % हिस्सा debt funding के जरिये जुटा रही हैं | जो की एक manageable risk हैं | इस तरह आप किसी भी कंपनी का debt to capital ratio पता कर सकतें हैं |

 

Debt to Capital Ratio से क्या पता चलता हैं ?

Debt to capital ratio एक मह्त्वपूर्ण financial metric हैं , जो की हमे बताता हैं , की कोई कंपनी अपने day to day operations run करने के लिए , अपनी total capital का कितने प्रतिशत हिस्सा debt funding के जरिये जुटा रही हैं |

जाहिर सी बात हैं , कोई कंपनी जितना ज्यादा कर्ज लेगी , उसे उतनी ही ज्यादा ( principal + interest ) payment देनी होगी | जो की समय के साथ कंपनी के मुनाफे को कम कर सकता हैं , इसके अलावा अगर कपनी की sales में कमी आती हैं , तो आगे जाकर यह दिवालिया होने की समस्या भी खड़ी कर सकती है |

लेकिन ऐसा जरुरी नहीं हैं , की Higher debt to capital ratio हमेशा बुरा माना जाता हैं , बजाय इसके अगर कंपनी debt का सही तरीके से उपयोग करके , अपनी sales को बढ़ा सकती हैं , और अपने cost of debt की तुलना में ज्यादा लाभ कमा सकती हैं , तो यह एक manageable risk की तरह हैं |

Generally , अन्य industries की तुलना में Capital intensive industries जैसे ( telecom , oil & gas , airlines , railways ) इत्यादि में higher debt to capital ratio का होना आम बात हैं , क्योंकि इस तरह की industries में ज्यादा मात्रा में fixed assets का होना  , ज्यादा labor cost का लगना इत्यादि , की वजह से इन्हे अपने day to day operations run करने के लिए अन्य industries की तुलना में ज्यादा capital की जरुरत पड़ती हैं |

 

Debt to Capital Ratio कितना होना चाहिए ?

Generally , Debt to capital ratio का 1 से अधिक होना , ज्यादा risky माना जाता हैं , क्योंकि आगे जाकर यह कंपनी को दिवालिया भी कर सकता हैं | वहीँ अगर यह ratio 1 से कम हैं , तो यह manageable risk कहा जा सकता हैं | Ideally , यह ratio 0.5 तक suitable माना जाता हैं |

 

Debt to Capital Ratio की सीमाएं

Debt to Capital ratio एक अहम् financial metric हैं , जो की किसी business owner और निवेशकों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता हैं | लेकिन इसमें ये ध्यान देना जरुरी हैं , की यह कंपनी की Accounting practice से प्रभावित हो सकता हैं , क्योंकि इसके लिए financial statements के जिस data का उपयोग किया जाता हैं , वो Historical cost पर आधारित होता हैं , न की current market value पर |

ध्यान दें , सिर्फ Debt to capital ratio देखकर कोई निर्णय न लें | इसके अलावा जब भी आप किसी कंपनी का debt to capital ratio पता करें , तो उसे same sector की बाकी कंपनियों के साथ जरूर compare कर लें |

 

 

 

 

उम्मीद करतें हैं , इस पोस्ट के माध्यम से दी गयी जानकारी जैसे ( Debt to capital ratio क्या हैं , Debt to capital ratio formula , Debt to capital ratio example तथा Debt to capital ratio की कमियां , इत्यादि ) आपके लिए उपयोगी साबित होगी |

अगर आपके पास इस पोस्ट से जुड़े अभी कोई सवाल हैं , तो उसे आप हमसे निचे दिए गएँ comment section में पूंछ सकतें हैं |

 

 

 

 

 

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